ब्यूरो रिपोर्ट/अश्वनी सिंह
मीडिया दर्शन/बेतिया: अतिक्रमण और लगातार उपेक्षा की शिकार चंद्रावत नदी अब बेतिया शहर के लिए गंभीर बाढ़ का खतरा बनती जा रही है। वर्ष 2015 से नदी के अतिक्रमण, सफाई और इसके प्राकृतिक स्वरूप को बहाल करने की मांग लगातार उठती रही है। इसके बावजूद समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए जाने का असर अब बाढ़ की स्थिति के रूप में सामने आ रहा है।
चंपारण तटबंध के टूटने और सुरक्षा बांधों के क्षतिग्रस्त होने के बाद बाढ़ के पानी ने चंद्रावत नदी के पुराने और प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र की ओर रुख किया। वहीं, कई स्थानों पर निकासी मार्ग अवरुद्ध होने के कारण पानी को पर्याप्त रास्ता नहीं मिला और यह सड़कों, गलियों तथा बस्तियों में फैल गया। इससे बेतिया शहर के कई हिस्सों में जलजमाव और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई।
गंडक से निकलकर दो धाराओं में बंटती है चंद्रावत
चंद्रावत नदी का उद्गम गंडक नदी से होता है। यह नदी योगापट्टी के गोला घाट से निकलकर बेतिया के पथरी घाट तक पहुंचती है। पथरी घाट के पास नदी दो शाखाओं में विभाजित हो जाती है।
इसकी एक शाखा नौतन की ओर से आगे बढ़ते हुए दोबारा गंडक नदी में मिलती है, जबकि दूसरी शाखा कोहरा नदी के रूप में मझौलिया प्रखंड से होकर आगे बढ़ती है और सिकरहाना में समाहित हो जाती है।
नदी की यह प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था आसपास के इलाकों के लिए लंबे समय से महत्वपूर्ण रही है। लेकिन समय के साथ नदी के प्रवाह क्षेत्र में हुए बदलाव ने इसकी जल निकासी क्षमता को प्रभावित किया है।
अतिक्रमण और गाद से लगातार सिकुड़ती गई नदी
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से चंद्रावत नदी के अतिक्रमण को लेकर सवाल उठते रहे हैं। आरोप है कि भू-माफियाओं ने नदी के प्रवाह क्षेत्र के आसपास कब्जा कर जमीनों की बिक्री की। इसके अलावा नदी में लगातार कचरा फेंके जाने और गाद व सिल्ट जमा होने से नदी का स्वरूप और चौड़ाई भी प्रभावित हुई।
नदी के कई हिस्सों में जलकुंभी और कचरे के जमाव के कारण पानी के प्रवाह में भी बाधा उत्पन्न हुई। धीरे-धीरे नदी का प्राकृतिक जल निकासी मार्ग कमजोर होता गया।
वर्षों तक लोग सीमाओं और बांधों की सुरक्षा के भरोसे रहे, लेकिन जब तटबंध टूटे और सुरक्षा बांध क्षतिग्रस्त हुए तो बाढ़ का पानी उन क्षेत्रों में पहुंच गया, जहां कभी नदी का प्राकृतिक प्रवाह रहा था।
तटबंध टूटने के बाद सामने आई जल निकासी की समस्या
चंपारण तटबंध के टूटने के बाद गंडक नदी के बढ़े जलस्तर का दबाव आसपास के इलाकों पर पड़ा। बाढ़ का पानी चंद्रावत नदी के प्राकृतिक मार्ग की ओर बढ़ा, लेकिन कई स्थानों पर निकासी मार्ग बाधित होने के कारण पानी तेजी से आगे नहीं निकल सका।
इसके परिणामस्वरूप बेतिया शहर की सड़कों, गलियों और बस्तियों में पानी फैलने लगा। इस स्थिति ने वर्षों से नदी की सफाई, अतिक्रमण हटाने और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने की जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है।
नगर निगम और प्रशासन अलर्ट मोड पर
बाढ़ और जलजमाव की स्थिति को देखते हुए नगर निगम और प्रशासन अलर्ट मोड पर हैं। शहर से पानी की निकासी के रास्तों को खोलने के लिए संत घाट, पथरी घाट से लेकर जगदंबा नगर साइफन तक उड़ाही और अतिक्रमण हटाने का काम तेज कर दिया गया है।
नगर निगम की टीम कई स्थानों पर जल निकासी में बाधा बन रहे कचरे, जलकुंभी और अन्य अवरोधों को हटाने में जुटी है। इसके लिए जेसीबी मशीनों की भी मदद ली जा रही है।
महापौर ने पथरी घाट पुल का किया निरीक्षण
बेतिया की महापौर ने पथरी घाट पुल का निरीक्षण कर जल निकासी की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान जेसीबी मशीनों की मदद से नदी और जल निकासी मार्ग में जमा जलकुंभी, कचरा तथा अन्य अवरोधों को हटाने का काम चल रहा था।
घाटों पर अतिरिक्त सफाई कर्मियों को भी तैनात किया गया है, ताकि जल निकासी के रास्तों को जल्द से जल्द साफ किया जा सके। नगर निगम प्रशासन की ओर से संवेदनशील स्थानों पर स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है।
प्राकृतिक स्वरूप बहाल करने की जरूरत
चंद्रावत नदी की मौजूदा स्थिति ने नदी के प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र को सुरक्षित रखने और अतिक्रमण हटाने की आवश्यकता को फिर सामने ला दिया है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से उठती रही मांगों के बीच मौजूदा बाढ़ की स्थिति यह संकेत दे रही है कि जल निकासी व्यवस्था को केवल तत्काल राहत तक सीमित रखने के बजाय स्थायी स्तर पर भी दुरुस्त करने की जरूरत है।
नदी के प्रवाह क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने, गाद की नियमित उड़ाही, कचरा फेंकने पर रोक और जल निकासी मार्गों को खुला रखने जैसे कदम भविष्य में बाढ़ के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
प्रशासन ने आम लोगों से मौजूदा स्थिति में सतर्क रहने और राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग करने की अपील की है। नागरिकों से अनावश्यक रूप से घाटों और पुलों पर भीड़ नहीं लगाने को कहा गया है।
प्रशासन ने लोगों से जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने और समय-समय पर जारी किए जा रहे सुरक्षा निर्देशों का पालन करने का अनुरोध किया है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन और नगर निगम की टीमें जल निकासी तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।