औरंगाबाद। जिले के बारुण प्रखंड अंतर्गत पिपरा गांव में मां दुर्गा की पूजा इस वर्ष भी श्रद्धा और उत्साह के साथ शुरू हो गई है। वर्ष 1963 से लगातार आयोजित हो रही इस दुर्गापूजा का इस बार 64वां आयोजन है। छह दशक से अधिक समय से चली आ रही यह परंपरा गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से आयोजित होने वाली इस पूजा में आज भी वही आस्था, समर्पण और उत्साह देखने को मिल रहा है।
1963 में शुरू हुई थी आजीवन संकल्पित दुर्गापूजा
बाल संघ समिति के राजा दिलीप सिंह ने बताया कि पिपरा गांव में आजीवन संकल्पित दुर्गापूजा की शुरुआत वर्ष 1963 में हुई थी। तब से लेकर आज तक किसी भी परिस्थिति में पूजा की परंपरा बाधित नहीं हुई है। इस दौरान समिति और ग्रामीणों ने कई उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन मां दुर्गा के प्रति उनकी आस्था और समर्पण लगातार बना रहा।
उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के सहयोग और सामूहिक प्रयासों से यह धार्मिक परंपरा निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्हें उम्मीद है कि आने वाली पीढ़ियां भी इस परंपरा को उसी श्रद्धा और निष्ठा के साथ आगे बढ़ाती रहेंगी।
महंत सच्चिदानंद मिश्र के परिवार की रही महत्वपूर्ण भूमिका
पिपरा गांव की दुर्गापूजा में धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व है। पूजा की व्यवस्था में महंत सच्चिदानंद मिश्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वर्तमान में उनके पुत्र जय मिश्रा पुरोहित के रूप में पूजा-पाठ की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
पूजा के दौरान विधि-विधान से धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जा रहे हैं। प्रतिदिन पूजा के बाद मां दुर्गा की आरती होती है, जिसमें गांव के श्रद्धालु शामिल होकर माता की आराधना करते हैं। पूजा को लेकर गांव में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।
20 से अधिक गांवों में थी दुर्गापूजा की लोकप्रियता
पूजा-पाठ में बैठे मंटू मालाकार ने बताया कि एक समय पिपरा गांव की दुर्गापूजा आसपास के 20 से अधिक गांवों में काफी लोकप्रिय थी। दशहरा के अवसर पर बाहर रहने वाले ग्रामीण भी अपने गांव लौट आते थे। कई लोगों के लिए साल में एक बार अपने गांव आने का प्रमुख अवसर दशहरा ही होता था।
उन्होंने बताया कि यह दुर्गापूजा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोगों को अपनी मिट्टी, परिवार और सामाजिक रिश्तों से जोड़ने का माध्यम भी बनी रही। दशहरा के दौरान गांव में लोगों की आवाजाही बढ़ जाती थी और सामूहिक उत्सव का माहौल रहता था।
हालांकि, समय के साथ परिस्थितियों में बदलाव आया है, लेकिन मां दुर्गा की पूजा के प्रति ग्रामीणों की आस्था आज भी कायम है। छह दशक से अधिक समय से चली आ रही यह परंपरा गांव के लोगों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़े हुए है।
ग्रामीणों के सहयोग से हो रहा आयोजन
पिपरा गांव में दुर्गापूजा के आयोजन में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी बनी हुई है। इस धार्मिक आयोजन में रामेश्वर भगत, राजेश रंजन, नंदू यादव, सुमित मिश्र, बचान मिश्रा, नीरज मिश्रा, सुनील साव, शैलेश मिश्रा, सुबोध पाल, अवध बिहारी ठाकुर और श्रीपति साव सहित कई ग्रामीण सक्रिय रूप से उपस्थित रहे।
ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से आयोजित हो रही यह दुर्गापूजा पिपरा गांव की आस्था, एकजुटता और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक बनी हुई है। मां दुर्गा की आराधना के साथ गांव में श्रद्धा और उत्साह का माहौल है।