औरंगाबाद। बिहार के औरंगाबाद जिले के देव स्थित पाताल गंगा में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर बनाए जाने की चर्चा के बीच विरोध तेज हो गया है। इस प्रस्ताव के खिलाफ विपक्ष के नेताओं के साथ-साथ सत्ता पक्ष के नेता भी आवाज उठा रहे हैं। भाजपा नेता प्रवीण सिंह के बाद अब जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष शशि चौरसिया ने भी PPP मॉडल पर मेडिकल कॉलेज के निर्माण का विरोध किया है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि मेडिकल कॉलेज का निर्माण PPP मॉडल पर हुआ, तो इसका हाल टोल टैक्स की तरह हो सकता है और इसका आर्थिक बोझ आम जनता को उठाना पड़ सकता है।
शशि चौरसिया ने कहा कि देव की जनता ने सरकारी मेडिकल कॉलेज की मांग की थी, न कि निजी भागीदारी वाले मेडिकल कॉलेज की। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री से मांग की कि देव के प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज का निर्माण PPP मॉडल पर नहीं कराया जाए और इसे सरकारी मेडिकल कॉलेज के रूप में ही विकसित किया जाए।
नीतीश कुमार ने 429 करोड़ रुपये की दी थी स्वीकृति
शशि चौरसिया ने कहा कि देव के पाताल गंगा में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की थी। उस समय इस परियोजना के लिए 429 करोड़ रुपये की राशि की स्वीकृति दी गई थी। अब उन्हें जानकारी मिल रही है कि मेडिकल कॉलेज का निर्माण PPP मॉडल पर किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वे इस मॉडल का विरोध करते हैं। यह केवल उनकी व्यक्तिगत आवाज नहीं है, बल्कि देव की जनता की भी आवाज है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के जो नेता और कार्यकर्ता PPP मॉडल पर मेडिकल कॉलेज बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं, वे उनका समर्थन करते हैं।
जब सरकार के पास पैसा है तो PPP मॉडल की जरूरत क्यों?
जदयू नेता ने सवाल उठाया कि जब सरकार के पास मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध है, तो फिर PPP मॉडल अपनाने की जरूरत ही क्या है? उन्होंने कहा कि जनता ने सरकारी मेडिकल कॉलेज की मांग की थी, निजी भागीदारी के आधार पर मेडिकल कॉलेज खोलने की मांग नहीं की थी।
शशि चौरसिया ने आशंका जताई कि यदि मेडिकल कॉलेज PPP मॉडल पर खुलता है, तो वहां भी बड़े निजी अस्पतालों जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों में इलाज कराने के लिए कई बार लोगों को अपनी जमीन और गहने तक बेचने पड़ते हैं। उन्हें डर है कि PPP मॉडल पर मेडिकल कॉलेज बनने से भी आम लोगों को इसी तरह की आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और स्वास्थ्य मंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप करने तथा मेडिकल कॉलेज को PPP मॉडल पर बनाने के प्रस्ताव को रोकने की मांग की।
PPP मॉडल पर बना तो टोल टैक्स जैसा हो जाएगा मेडिकल कॉलेज
शशि चौरसिया ने PPP मॉडल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई निजी कंपनी परियोजना में 75 प्रतिशत राशि लगाएगी, तो वह इस निवेश की वसूली भी करेगी। उन्होंने सवाल किया कि कंपनी अपना पैसा आखिर किससे वसूलेगी? उनके अनुसार, इसका बोझ अंततः जनता पर ही पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि PPP मॉडल पर बनने वाला मेडिकल कॉलेज टोल टैक्स की तरह हो सकता है, जहां निजी कंपनी लंबे समय तक लोगों से पैसे वसूलती रहेगी। उन्होंने आशंका जताई कि एक बार मेडिकल कॉलेज बन जाने के बाद संबंधित कंपनी 30 से 40 साल तक वसूली कर सकती है।
जदयू नेता ने कहा कि यदि सरकारी मेडिकल कॉलेज की जगह PPP मॉडल पर इसका निर्माण कराया गया, तो जनता में भारी आक्रोश पैदा होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता इस मुद्दे को लेकर आने वाले चुनाव में अपना जवाब देगी।
भाजपा नेता प्रवीण सिंह ने भी उठाया था सवाल
देव मेडिकल कॉलेज के निर्माण को लेकर भाजपा नेता प्रवीण सिंह भी PPP मॉडल पर सवाल उठा चुके हैं। शशि चौरसिया के अनुसार, प्रवीण सिंह ने जिला निबंधन पदाधिकारी से पूछा था कि क्या मेडिकल कॉलेज PPP मॉडल पर बनाया जा रहा है। इस पर पदाधिकारी ने कथित तौर पर कहा कि उन्होंने तो रजिस्ट्रेशन कर दिया है, अब आगे क्या बनेगा, यह राज्य सरकार तय करेगी।
इस मामले में अब सत्ता पक्ष के नेताओं के बीच भी PPP मॉडल को लेकर विरोध के स्वर सामने आ रहे हैं। शशि चौरसिया ने स्पष्ट किया कि देव में मेडिकल कॉलेज का निर्माण सरकारी व्यवस्था के तहत होना चाहिए, ताकि आम जनता को सुलभ और किफायती चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें।
फिलहाल, देव के प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज को PPP मॉडल पर बनाए जाने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच शशि चौरसिया ने सरकार से इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि मेडिकल कॉलेज का उद्देश्य जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना होना चाहिए, न कि इलाज के खर्च का अतिरिक्त बोझ आम लोगों पर डालना।