मीडिया दर्शन/औरंगाबाद: औरंगाबाद के देव में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को लेकर भाजपा नेता प्रवीण सिंह ने इसके PPP (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिले की जनता लंबे समय से सरकारी मेडिकल कॉलेज की उम्मीद कर रही थी, लेकिन अब इसके PPP मॉडल पर विकसित और संचालित किए जाने की चर्चा है। उन्होंने सरकार से परियोजना की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट करने तथा आम लोगों के लिए सुलभ और किफायती चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
हाल की रिपोर्टों के अनुसार, देव में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। परियोजना में 430 बेड और 100 MBBS सीटों का प्रावधान बताया गया है। इसकी लागत अलग-अलग रिपोर्टों में करीब 400.29 करोड़ से 430 करोड़ रुपये के बीच बताई गई है।
430 करोड़ की मंजूरी के बाद PPP पर सवाल
प्रेस वार्ता में प्रवीण सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से देव में मेडिकल कॉलेज की घोषणा की गई थी और इसके लिए करीब 430 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत किए जाने की बात सामने आई थी। ऐसे में अब PPP मॉडल की व्यवस्था को लेकर उन्होंने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन और सरकारी संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं तो इसके संचालन एवं प्रबंधन में निजी कंपनी की भूमिका क्यों रखी जा रही है।
हालांकि, बिहार सरकार की ओर से 2026 में राज्य में मेडिकल कॉलेजों को PPP मॉडल के तहत विकसित करने की नीति की जानकारी दी गई थी। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी में ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड मेडिकल कॉलेजों को लोक-निजी भागीदारी के तहत विकसित करने की बात कही गई थी।
निजी कंपनी के लंबे समय तक संचालन की आशंका जताई
प्रवीण सिंह ने दावा किया कि PPP व्यवस्था में सरकार जमीन उपलब्ध करा सकती है और निर्माण के बाद अस्पताल के संचालन की जिम्मेदारी लंबे समय के लिए निजी भागीदार को दी जा सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि इससे डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति तथा अस्पताल के प्रशासनिक संचालन में निजी कंपनी की बड़ी भूमिका हो सकती है।
उन्होंने सवाल किया कि ऐसी व्यवस्था में आम लोगों को सुलभ और किफायती इलाज किस तरह सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा शर्तों का असर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ सकता है।
प्रवीण सिंह ने औरंगाबाद में एम्स जैसी सुविधाओं वाला सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल विकसित करने की मांग की। उनका कहना था कि बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होने से जिले के लोगों को इलाज के लिए दूसरे बड़े शहरों का रुख करने की जरूरत कम होगी।
बिहार में PPP मॉडल पर मेडिकल कॉलेजों की नीति
बिहार सरकार ने 2026 में राज्य के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के विकास एवं संचालन में PPP मॉडल को शामिल करने की दिशा में कदम उठाए हैं। मई में मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड मेडिकल कॉलेजों को PPP के तहत विकसित करने की जानकारी दी गई थी।
इसके बाद अगस्त 2026 में राज्य मंत्रिमंडल ने 16 ब्राउनफील्ड मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों को PPP मॉडल पर संचालित करने की प्रक्रिया को मंजूरी दी थी। इस फैसले में डेंटल कॉलेज एवं अस्पताल भी शामिल बताए गए थे।
औरंगाबाद के देव में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के संदर्भ में ताजा रिपोर्टों में करीब 400.29 करोड़ रुपये की परियोजना लागत, 430 बेड और 100 MBBS सीटों का उल्लेख है। वहीं इससे पहले करीब 430 करोड़ रुपये की लागत की जानकारी सामने आई थी।
परियोजना की शर्तें सार्वजनिक करने की मांग
प्रवीण सिंह ने कहा कि मेडिकल कॉलेज के निर्माण, संचालन, कर्मचारियों की नियुक्ति, मरीजों के इलाज और निजी भागीदार की भूमिका से संबंधित सभी शर्तों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि जिले की जनता को पूरी जानकारी मिल सके।
उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज किस मॉडल पर संचालित होगा, सरकार और निजी भागीदार की जिम्मेदारियां क्या होंगी तथा मरीजों को किस प्रकार की सुविधाएं और शुल्क व्यवस्था मिलेगी, इन सभी बिंदुओं पर सरकार को स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।
भाजपा नेता ने सरकार से मेडिकल कॉलेज की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। वहीं, परियोजना से संबंधित अंतिम संचालन शर्तों और PPP समझौते की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही निजी भागीदार की भूमिका और व्यवस्था की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।