मीडिया दर्शन/औरंगाबाद: बिहार के औरंगाबाद जिले में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) कार्यालय में कार्यरत निम्नवर्गीय लिपिक अरविंद कुमार पर रिश्वत लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी के कथित फर्जी हस्ताक्षर से सरकारी दस्तावेज और आदेश जारी करने का आरोप लगा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए मगध प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (RRDDE) संजय कुमार चौधरी ने लिपिक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
दो शिक्षकों के काम में फर्जी हस्ताक्षर का आरोप
मामला दो शिक्षकों से जुड़े सरकारी कार्यों का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, उत्क्रमित उच्च विद्यालय, चतरा में कार्यरत शिक्षक रवि रंजन कुमार ने योग्यता विस्तार से संबंधित आदेश जारी कराने के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में आवेदन दिया था।
वहीं, राजकीय मध्य विद्यालय, पाली, नबीनगर की शिक्षिका गरिमा चौहान ने अपनी सेवा पुस्तिका पर हस्ताक्षर कराने के लिए आवेदन दिया था।
आरोप है कि कार्यालय में कार्यरत लिपिक अरविंद कुमार ने दोनों मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बजाय कथित रूप से रिश्वत लेकर काम निपटाने की कोशिश की।
DEO के नाम से कथित फर्जी हस्ताक्षर
आरोप के मुताबिक, लिपिक ने शिक्षिका गरिमा चौहान की सेवा पुस्तिका पर जिला शिक्षा पदाधिकारी के कथित फर्जी हस्ताक्षर कर दिए। इसके अलावा शिक्षक रवि रंजन कुमार के योग्यता विस्तार की स्वीकृति से संबंधित कार्यालय आदेश पर भी डीईओ की जगह कथित रूप से स्वयं हस्ताक्षर कर आदेश जारी कर दिया।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर इसकी जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। सरकारी दस्तावेजों पर पदाधिकारी के नाम से कथित फर्जी हस्ताक्षर किए जाने को विभाग ने गंभीरता से लिया।
स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देने का आरोप
मामले के सामने आने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से लिपिक अरविंद कुमार से स्पष्टीकरण मांगा गया था। विभागीय स्तर पर जवाब मांगे जाने के बावजूद लिपिक द्वारा कथित रूप से स्पष्टीकरण का जवाब नहीं दिए जाने की बात सामने आई।
विभाग ने इसे अधिकारियों के आदेश की अवहेलना के रूप में भी देखा।
DEO की रिपोर्ट पर RDDDE ने की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी दयाशंकर सिंह ने पूरे प्रकरण से मगध प्रमंडल के क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक संजय कुमार चौधरी को अवगत कराया।
इसके बाद आरडीडीई ने कार्रवाई करते हुए आरोपी लिपिक अरविंद कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
लिपिक के खिलाफ हुई इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सरकारी दस्तावेजों पर कथित फर्जी हस्ताक्षर और पदाधिकारी के नाम से आदेश जारी करने के आरोपों ने कार्यालयीय प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
फिलहाल, निलंबन की कार्रवाई के बाद विभागीय स्तर पर मामले की आगे की प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है। आरोपों की पूरी स्थिति विभागीय जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।