मीडिया दर्शन/बेतिया: नेपाल के तराई क्षेत्र में भारी बारिश के बाद गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि से पश्चिम चंपारण के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। इसी बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बुधवार को पश्चिम चंपारण के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने पहुंचे। मुख्यमंत्री ने बगहा, बैरिया के बथना, योगापट्टी के मच्छरगांवा तथा नौतन के शिवराजपुर, बनकटवा और आसपास के क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके बाद उन्होंने बथना स्थित बाढ़ राहत शिविर का निरीक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान कुछ स्थानों पर बाढ़ पीड़ितों और ग्रामीणों का आक्रोश भी सामने आया। राहत व्यवस्था और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को लेकर लोगों ने नारेबाजी की। इसी दौरान पश्चिम चंपारण के भाजपा सांसद डॉ. संजय जायसवाल की गाड़ी पर गोबर फेंके जाने की घटना भी सामने आई। घटना के बाद मौके पर कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई और सुरक्षाकर्मियों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी।
नौतन में स्थानीय विधायक के खिलाफ नारेबाजी
नौतन क्षेत्र में राहत व्यवस्था और स्थानीय समस्याओं को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी दिखाई दी। रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ प्रभावित लोगों ने स्थानीय भाजपा विधायक नारायण प्रसाद के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
ग्रामीणों का आरोप था कि लंबे समय से क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं, खासकर पुल निर्माण और बाढ़ से बचाव से जुड़े मुद्दों को लेकर मांग की जाती रही है, लेकिन अपेक्षित स्तर पर समाधान नहीं हुआ। लोगों ने राहत एवं बचाव कार्यों में भी तेजी लाने की मांग की।
सांसद की गाड़ी पर गोबर फेंके जाने से बढ़ा तनाव
बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच विरोध के दौरान पश्चिम चंपारण के भाजपा सांसद डॉ. संजय जायसवाल की गाड़ी को लेकर भी स्थिति तनावपूर्ण हो गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आक्रोशित लोगों ने सांसद की गाड़ी पर गोबर और मिट्टी फेंकी।
घटना के बाद सुरक्षाकर्मियों ने सांसद को भीड़ से सुरक्षित निकालने की कोशिश की। इस दौरान मौके पर अफरातफरी की स्थिति बन गई। रिपोर्टों में बताया गया है कि बढ़ते तनाव के बीच सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया गया।
10 वर्षों से पुल निर्माण की मांग का दावा
आक्रोशित ग्रामीणों का कहना था कि वे पिछले करीब 10 वर्षों से क्षेत्र में पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, बार-बार मांग उठाए जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
लोगों का आरोप है कि हर साल बाढ़ के दौरान राहत और बचाव पर बड़ी राशि खर्च होती है, लेकिन बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों की मूलभूत समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि समय रहते पुल और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े जरूरी कार्य पूरे किए जाते, तो लोगों को हर साल ऐसी कठिन परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता।
बथना राहत शिविर में महिला ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की
मुख्यमंत्री के बथना स्थित राहत शिविर के निरीक्षण के दौरान भी लोगों की नाराजगी सामने आई। राहत शिविर में मुख्यमंत्री बाढ़ पीड़ितों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुन रहे थे। इसी दौरान एक महिला ने सुरक्षा घेरा पार कर मुख्यमंत्री तक पहुंचने की कोशिश की।
सुरक्षाकर्मियों ने तत्काल महिला को रोक लिया। महिला बाढ़ की वजह से अपने सामने आई परेशानियों और समस्याओं को मुख्यमंत्री तक पहुंचाना चाहती थी। घटना के बाद सुरक्षाकर्मियों ने मुख्यमंत्री के आसपास सुरक्षा घेरा और मजबूत कर दिया।
राहत शिविर में व्यवस्थाओं का लिया जायजा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बथना स्थित पीएम श्री राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में संचालित राहत शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने सामुदायिक रसोई, चिकित्सा शिविर, पेयजल, शौचालय, पशु राहत शिविर, पशु शेड तथा महिलाओं और पुरुषों के लिए की गई आवासन व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने सामुदायिक रसोई में बाढ़ प्रभावित लोगों को स्वयं भोजन भी परोसा।
मुख्यमंत्री ने राहत शिविर में संचालित अस्थायी आंगनबाड़ी बाल शिविर का भी निरीक्षण किया और बच्चों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई तथा उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। चिकित्सा शिविर में दवाओं और उपचार की व्यवस्था का भी जायजा लिया गया।
बाढ़ प्रभावित परिवारों को 7 हजार रुपये सहायता देने का निर्देश
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को दशहरा से पहले प्रति परिवार 7 हजार रुपये की अनुग्रह सहायता राशि उपलब्ध कराने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने राहत शिविरों में सामुदायिक रसोई तब तक चलाने के निर्देश दिए, जब तक प्रभावित लोग अपने घरों को वापस नहीं लौट जाते और स्थिति सामान्य नहीं हो जाती। साथ ही सूखा राशन, पशुओं के लिए चारा, नावों तथा अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
एक दिन पहले विधायक विनय बिहारी ने दिया था धरना
मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हुआ जब एक दिन पहले ही भाजपा विधायक विनय बिहारी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में मुख्यमंत्री के दौरे और राहत व्यवस्था से जुड़ी मांगों को लेकर धरना दिया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने पश्चिम चंपारण के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया।
रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने बगहा, बैरिया, योगापट्टी और नौतन के प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया। इसके अलावा सारण जिले के मकेर प्रखंड के हैजलपुर पंचायत में टूटे तटबंध का भी हवाई सर्वेक्षण किया गया।
राहत कार्यों में तेजी की मांग
मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान सामने आए विरोध और नारेबाजी से यह स्पष्ट हुआ कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और स्थायी समाधान को लेकर लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने राहत सामग्री, बाढ़ नियंत्रण, पुल निर्माण और स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक कार्रवाई में तेजी लाने की मांग की।
प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य जारी रखने, सामुदायिक रसोई संचालित करने और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने की बात कही गई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्थिति पर लगातार नजर रखने तथा प्रभावित लोगों की समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।