वीडियो में 500-500 रुपये के नोटों की गड्डी जेब में रखते दिख रहे कथित लिपिक; मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की उठी मांग
मीडिया दर्शन/मझौलिया (पश्चिम चंपारण): मझौलिया अंचल कार्यालय से कथित तौर पर रिश्वत लेने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। वीडियो में अंचल कार्यालय के लिपिक रवि भूषण कथित रूप से 10 हजार रुपये लेते और 500-500 रुपये के नोटों की गड्डी अपनी जेब में रखते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
हालांकि, मीडिया दर्शन इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है। वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति, स्थान, बातचीत और लेन-देन की परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
वीडियो में नोटों की गड्डी जेब में रखते दिखे व्यक्ति
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में एक व्यक्ति के हाथ में नोटों की गड्डी दिखाई देती है। इसके बाद वह व्यक्ति कथित तौर पर नोटों को अपनी जेब में रखता नजर आता है। वीडियो में बातचीत भी रिकॉर्ड हुई है।
वीडियो में एक व्यक्ति को यह कहते हुए सुना जा रहा है— “तुम हमको बताओगे... साढ़े तीन वर्षों से मझौलिया प्रखंड क्षेत्र में 29 पंचायत के लोग जानते हैं...”
वहीं, दूसरी ओर से राशि देने वाला व्यक्ति कथित तौर पर कहता सुनाई दे रहा है— “मैं काम छोड़कर आया हूं आपको पैसा देने के लिए।”
वीडियो में हुई बातचीत और लेन-देन किस सरकारी कार्य के सिलसिले में था, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह दाखिल-खारिज, भूमि मापी, राजस्व रसीद या किसी अन्य कार्य से संबंधित था या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
वायरल वीडियो के बाद जांच की मांग
वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और ग्रामीणों के बीच मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि यदि वीडियो में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
हालांकि, स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे अन्य आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले प्रशासनिक जांच और संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान महत्वपूर्ण होगा।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी सच्चाई
मामले में अंचल प्रशासन और जिला प्रशासन की ओर से आधिकारिक जांच या कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जांच में वायरल वीडियो की प्रामाणिकता, उसमें दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान, लेन-देन की वास्तविक प्रकृति और कथित रकम के उद्देश्य की पड़ताल की जा सकती है।
यदि जांच में रिश्वत लेने के आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय और कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, मीडिया दर्शन उपलब्ध वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है और आरोपों को सत्यापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं कर रहा है।