मीडिया दर्शन/बेतिया: पश्चिम चंपारण में गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर और तटबंधों में हुई क्षति के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों में जलस्तर, तटबंधों, कटाव और राहत-बचाव व्यवस्था की जानकारी ली तथा बाढ़ पीड़ितों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनीं। अधिकारियों के साथ समीक्षा के दौरान राहत सामग्री, भोजन, आवास, चिकित्सा और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन कर प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाने पर जोर दिया गया।
पश्चिम चंपारण में पिछले दिनों गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई है। चंपारण तटबंध के कई स्थानों पर टूटने और निचले इलाकों में पानी फैलने की खबरें सामने आई हैं।
विधायक विनय बिहारी की मांग के बाद मुख्यमंत्री का दौरा
मुख्यमंत्री का पश्चिम चंपारण दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब लौरिया के भाजपा विधायक विनय बिहारी बाढ़ राहत व्यवस्था को लेकर जिला प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठे थे। उनकी मांग थी कि मुख्यमंत्री स्वयं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लें और पीड़ितों को पर्याप्त राहत उपलब्ध कराई जाए। रिपोर्टों के अनुसार, विधायक ने राशन, पॉलिथीन, पानी और दवाओं जैसी जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की थी।
इसके बाद मुख्यमंत्री के जिले में पहुंचने से बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हुईं। मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की जानकारी लेने के साथ अधिकारियों को राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
बैरिया, नौतन, योगापट्टी और बगहा में बाढ़ का जायजा
मुख्यमंत्री के भ्रमण कार्यक्रम में पश्चिम चंपारण के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण शामिल रहा। बैरिया, नौतन, योगापट्टी और बगहा क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति तथा तटबंधों की स्थिति का जायजा लिया गया।
बैरिया क्षेत्र के बथना में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से बाढ़ की स्थिति और प्रशासनिक तैयारियों की जानकारी ली। अधिकारियों ने उन्हें प्रभावित इलाकों, जलस्तर और राहत-बचाव की स्थिति के बारे में जानकारी दी।
वहीं, बगहा और आसपास के क्षेत्रों में भी गंडक के बढ़े जलस्तर का असर देखा गया है। हाल के दिनों में बगहा, बैरिया और योगापट्टी के निचले इलाकों में पानी फैलने तथा तटबंधों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई थीं।
बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं सुनीं, राहत पहुंचाने पर जोर
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित लोगों की समस्याएं सुनीं। पीड़ितों की ओर से भोजन, रहने की व्यवस्था, पेयजल, चिकित्सा सुविधा, पशुओं के लिए चारा और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने से जुड़ी समस्याएं सामने रखी गईं।
बाढ़ से प्रभावित परिवारों के घर, मवेशी, फसल और अन्य संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन कर सहायता और अनुदान उपलब्ध कराने की मांग भी उठी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक आवश्यक राहत पहुंचाने और प्रशासनिक स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों के लिए प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय रखा गया है। गंडक के जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर भी लगातार निगरानी की जा रही है।
नुकसान का आंकड़ा जुटाकर प्रभावितों तक पहुंचाई जाए सहायता
मुख्यमंत्री ने बाढ़ से हुए नुकसान का आंकड़ा जुटाने पर भी जोर दिया। प्रभावित परिवारों के घर, फसल, पशुधन, सड़क, पुल-पुलिया और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान का आकलन करने के बाद नियमानुसार सहायता और क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई।
बाढ़ के बाद प्रभावित क्षेत्रों में घरों के पुनर्निर्माण, क्षतिग्रस्त पुल-पुलिया और सड़कों की मरम्मत, स्वच्छ पेयजल, भोजन, चिकित्सा तथा शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती है। ऐसे में प्रशासन को राहत कार्यों के साथ-साथ बाढ़ के बाद पुनर्वास और पुनर्निर्माण की तैयारियां भी करनी होंगी।
गंडक और कोसी तटबंधों को मजबूत करने की घोषणा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गंडक और कोसी नदी के तटबंधों को मजबूत और पक्का करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि तटबंधों को मजबूत करने के लिए सर्वे का काम चल रहा है और इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
तटबंधों को मजबूत करने का उद्देश्य भविष्य में बाढ़ के दौरान संवेदनशील इलाकों में नुकसान के जोखिम को कम करना और नदी के बढ़े जलस्तर से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों को बेहतर सुरक्षा देना है।
बाढ़ को लेकर भाजपा विधायक ने उठाए थे राहत व्यवस्था पर सवाल
मुख्यमंत्री के दौरे से पहले लौरिया के भाजपा विधायक विनय बिहारी ने बाढ़ राहत व्यवस्था को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाते हुए धरना दिया था। विधायक का कहना था कि प्रभावित लोगों को उनकी जरूरत के मुताबिक पर्याप्त राहत सामग्री और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के लिए राशन, पॉलिथीन, पानी और दवाओं की पर्याप्त व्यवस्था की मांग की थी।
मुख्यमंत्री के दौरे को विधायक की इसी मांग के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालांकि, राहत व्यवस्था को लेकर लगाए गए आरोपों और प्रशासन की वास्तविक स्थिति का आकलन प्रभावित क्षेत्रों में उपलब्ध राहत सामग्री तथा सरकारी आंकड़ों से किया जाना जरूरी है।
विपक्षी नेताओं ने भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का किया दौरा
बाढ़ के बीच विपक्षी दलों के नेताओं ने भी पश्चिम चंपारण के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया है। पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव, चनपटिया के कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन और सिकटा के पूर्व विधायक वीरेंद्र चौधरी के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचकर लोगों से मिलने की बात सामने आई है।
आपके दिए विवरण के अनुसार, इन नेताओं ने प्रभावित परिवारों की समस्याएं सुनीं और सरकार से राहत एवं सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। इनमें प्रत्येक प्रभावित परिवार को 10 हजार रुपये की सहायता और एक क्विंटल चावल उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल है।
विपक्षी नेताओं ने बाढ़ पीड़ितों के घरों के पुनर्निर्माण और फसल नुकसान की भरपाई के लिए सहायता उपलब्ध कराने की मांग सरकार के सामने रखी है। यह मांग विपक्षी नेताओं की ओर से रखी गई है; इस पर सरकार की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, यह आगे स्पष्ट होगा।
राहत व्यवस्था और पुनर्वास पर अब नजर
पश्चिम चंपारण में गंडक के बढ़े जलस्तर और तटबंधों को नुकसान के बाद बाढ़ प्रभावित लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं। जिले के कई इलाकों में घरों और खेतों में पानी पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई है।
मुख्यमंत्री के दौरे के बाद अब प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री, भोजन, पेयजल, चिकित्सा और अन्य जरूरी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराने के साथ-साथ बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन और क्षतिपूर्ति की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। वहीं, गंडक और कोसी तटबंधों को मजबूत करने की घोषणा के बाद इसकी जमीनी प्रगति पर भी लोगों की नजर रहेगी।