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‘बिना वजह मतदाताओं को परेशान किया जा रहा’, ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से की प्रक्रिया बदलने की मांग

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर एक बार फिर चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर मौजूदा प्रक्रिया में गंभीर खामियों का आ

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satyam kumar sinha संवाददाता, Media Darshan
13 जनवरी 2026, 12:36 PM IST (13 जनवरी 2026) अपडेट: 10 अक्टूबर 2026, 05:48 PM IST
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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर एक बार फिर चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर मौजूदा प्रक्रिया में गंभीर खामियों का आरोप लगाया और कहा कि इसके कारण योग्य मतदाताओं को बिना किसी गलती के परेशान किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि जिन मतदाताओं को सुनवाई के नोटिस भेजे जा रहे हैं, वे पहले से ही वर्ष 2002 की मतदाता सूची में स्वयं या अपने परिजनों के माध्यम से दर्ज और सत्यापित हैं। ऐसे मामलों में दोबारा सुनवाई नोटिस जारी करना पूरी तरह अनावश्यक है। इससे आम लोगों में भ्रम फैल रहा है और उन्हें मानसिक तथा प्रशासनिक दबाव झेलना पड़ रहा है। ममता बनर्जी ने कहा कि फील्ड में काम कर रही टीमों को भी जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि मतदाता इसे बेवजह उत्पीड़न मान रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने एसआईआर प्रक्रिया में दो प्रमुख खामियों की ओर चुनाव आयोग का ध्यान दिलाया। पहली खामी यह है कि सुनवाई के दौरान मतदाता सभी जरूरी दस्तावेज जमा कर रहे हैं, लेकिन कई मामलों में उन्हें इन दस्तावेजों की कोई रसीद या पावती नहीं दी जा रही। बाद में जब रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात कही जाती है, तो इसी आधार पर मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए जाते हैं। ममता ने इसे पूरी तरह गलत और अस्वीकार्य बताया।

दूसरी खामी के तौर पर उन्होंने 2002 की मतदाता सूचियों के डिजिटलीकरण पर सवाल उठाए। ममता बनर्जी का कहना है कि पुराने रिकॉर्ड को एआई टूल के जरिए स्कैन और अंग्रेजी में अनुवाद करने के दौरान नाम, उम्र, लिंग और रिश्तों से जुड़ी कई गंभीर गलतियां हुई हैं। इन्हीं त्रुटियों के कारण बड़ी संख्या में मतदाताओं को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ की श्रेणी में डाल दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि पिछले 23 वर्षों में कई मतदाताओं ने फॉर्म-8 के माध्यम से अपने विवरण दुरुस्त कराए थे, जिन्हें विधिवत मंजूरी दी गई थी और वे 2025 की मतदाता सूची में भी शामिल हैं। इसके बावजूद उनसे दोबारा पहचान साबित करने की मांग को उन्होंने मनमाना और असंवैधानिक करार दिया। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग से अपील की कि वह मामूली त्रुटियों को टेबल-टॉप स्तर पर सुलझाए और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे।

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