सासाराम ।गुरु के चरणों मे अपने आप को समर्पित करना ही भक्ति है ।गुरु ब्रम्हा ,विष्णु और महेश के ही स्वरूप होते हैं ।गृहस्थ जीवन मे माता पिता के चरणों की भक्ति से ही प्रभु प्रसन्न होते हैं यह बात बसांव मठ के पीठाधीश्वर महान संत और परमज्ञानी स्वामी अच्च्युत प्रपन्नाचार्य जी महाराज ने कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए बसांव मठ के पंचम पीठाधीश्वर स्वामी राघवप्रपन्नाचार्य जी महाराज के 33 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित पूजा अर्चना के बाद बातचीत के दौरान कही ।स्वामी जी महाराज ने कहा कि गुरु का ज्ञान मानव जीवन के लिए चक्षु का काम करता है
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।इस अवसर पर स्वामी जी के द्वारा भव्य आरती का आयोजन किया गया तत्पश्चात प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया । बातचीत कें क्रम स्वामी जी ने कहा कि इस मौके पर श्रावण शुक्ल पक्ष के पंचमी से ही झूलन का आयोजन किया जाता है जिसका दर्शन काफी संख्या में भक्त दर्शन करने आते हैं । इस मौके पर स्वामी जी महाराज ने कहा कि गुरु केवल अपने शिष्यों को उपदेश ही नही देते बल्कि सन्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं ।
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इस मौके पर प्रत्येक दिन शाम को भजन कीर्तन का भी कार्यक्रम किया जाता है ।कार्यक्रम में मुख्य रूप से सीताराम विवाह आश्रम के महंत स्वामी राजा राम शरण जी, श्रीनिवास मठ के महंत दामोदरा चार्य ,रेवतीपुर मठ के महंत दामोदरा चार्य ,काशी के हयग्रीवा चार्य ,श्री निवास मुकुंद रामानुज महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ उमा शंकर पांडेय ,भाजपा नेता कमलेश कुमार सिंह ,बसाँव मठ के प्रबंधक पुरुषोत्तम तिवारी, दीनानाथ पांडेय,सहायक प्राचार्य डॉ उमेश चौबे,डॉ ओम प्रकाश, डॉ रितेश पाठक,हर्ष पांडेय,,युवा कोंग्रेस नेता कृष्णकांत दुबे,सोनू त्रिगुण,श्रीरंग तिवारी ,सहयोगियों के साथ सैकड़ों की संख्या में भक्त शामिल थे।
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