औरंगाबाद: नवरात्र के दौरान NH-139 पटना-औरंगाबाद-हरिहरगंज सड़क के फोरलेनिंग को केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद औरंगाबाद में इसका श्रेय लेने की सियासत तेज हो गई है। पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह और वर्तमान सांसद अभय कुशवाहा ने इस उपलब्धि को लेकर अपने-अपने प्रयासों का दावा किया है। दोनों नेताओं के बयानों के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है।
पूर्व सांसद बोले- लोकसभा में दर्जनों बार उठाया था मामला
पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने नवरात्र के दौरान प्रेसवार्ता कर कहा कि दिल्ली में भारत सरकार और बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों के बीच हुई बैठक में NH-139 के फोरलेनिंग पर अंतिम मुहर लगी है। उन्होंने बताया कि यह सड़क पहले NH-98 के नाम से जानी जाती थी और पटना से अरवल, औरंगाबाद, छतरपुर होते हुए झारखंड के पड़वा मोड़ तक जाती है। इसकी लंबाई करीब 160 से 170 किलोमीटर है।
सुशील सिंह ने कहा कि यह सड़क बिहार और झारखंड के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के बिलासपुर और रायपुर तक के लोगों को बिहार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने दावा किया कि परियोजना का डीपीआर लगभग तैयार है और जल्द ही निविदा जारी की जाएगी।
पूर्व सांसद ने कहा कि बिहार सरकार ने पहली बार उनकी अनुशंसा पर अमृतलाल मीणा के माध्यम से इस सड़क के फोरलेनिंग का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। उनके अनुसार, सांसद रहते हुए उन्होंने लोकसभा में शून्यकाल और नियम 377 के तहत दर्जनों बार इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि जब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी बोधगया आए थे, तब उन्होंने मंच से फोरलेन की मांग रखी थी और इसके बाद फोरलेन बनाने की घोषणा की गई थी।
अभय कुशवाहा बोले- 2024 से लगातार कर रहा हूं प्रयास
वर्तमान सांसद अभय कुशवाहा ने दुर्गापूजा के बाद बुधवार को प्रेसवार्ता कर पूर्व सांसद के दावे पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उनके तीन प्रमुख मुद्दे थे—NH-139 की फोरलेनिंग, औरंगाबाद में मेडिकल कॉलेज की स्थापना और उत्तर कोयल नहर परियोजना के सभी लंबित कार्यों को पूरा कराना।
अभय कुशवाहा ने कहा कि NH-139 की फोरलेनिंग को लेकर वह 2024 से लगातार केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर मांग उठाते रहे हैं। उन्होंने बताया कि 30 सितंबर को मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई और इसके बाद 1 अक्टूबर को दिल्ली में बैठक हुई, जिसमें इस परियोजना को मंजूरी मिली।
उन्होंने पूर्व सांसद के दावे पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोग यह कह रहे हैं कि काम उनके पत्र के आधार पर हुआ। अभय कुशवाहा ने कहा कि जब उस समय सांसद सुशील कुमार सिंह थे तो पत्र उनका होना स्वाभाविक है, लेकिन वर्तमान में उनके द्वारा दिए गए पत्र का प्रमाण उनके पास मौजूद है।
उत्तर कोयल नहर के शिलान्यास को लेकर भी आमने-सामने
प्रेसवार्ता के दौरान उत्तर कोयल नहर परियोजना के शिलान्यास को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर भी अभय कुशवाहा ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना पर काम सरकार ही कराती है। सांसद के तौर पर उनका काम योजनाओं को पूरा कराने की मांग करना और उसके लिए प्रयास करना है।
उन्होंने दावा किया कि उत्तर कोयल नहर परियोजना के लिए भी उन्होंने लगातार प्रयास किया। उनके प्रयास के बाद परियोजना को तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति मिली और इसके बाद टेंडर की प्रक्रिया पूरी हुई। अभय कुशवाहा ने कहा कि इन प्रक्रियाओं के बाद उन्होंने परियोजना का शिलान्यास किया।
वर्तमान सांसद ने इस मुद्दे पर पूर्व सांसद को खुली चुनौती देते हुए कहा कि आमने-सामने बैठकर यह तय किया जा सकता है कि उत्तर कोयल नहर परियोजना की तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति और टेंडर कब हुआ था। उन्होंने पूर्व सांसद का नाम लिए बिना कहा कि यदि उनके कार्यकाल में ही टेंडर हो चुका होता और बाद में उन्होंने शिलान्यास किया होता, तो वह उनके द्वारा कही गई बात को स्वीकार कर लेते।
NH-139 के फोरलेनिंग की मंजूरी के बाद अब औरंगाबाद में सड़क परियोजना से जुड़े विकास कार्यों के साथ-साथ इसका श्रेय लेने की राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। दोनों नेताओं के दावों ने इस मुद्दे को स्थानीय राजनीति में चर्चा का केंद्र बना दिया है।