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अमित शाह ने फिर दोहराया – ‘आतंकवाद को किसी धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए’

भारत के परंपरागत दृष्टिकोण को एक बार फिर दोहराते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आतंकवाद के वित्त पोषण को आतंकवाद से भी ज्यादा बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि इसे किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। शाह ने कहा कि आतंकवादी

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satyam kumar sinha संवाददाता, Media Darshan
19 नवंबर 2022, 01:18 PM (19 नवंबर 2022) 95 व्यूज
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भारत के परंपरागत दृष्टिकोण को एक बार फिर दोहराते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आतंकवाद के वित्त पोषण को आतंकवाद से भी ज्यादा बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि इसे किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। शाह ने कहा कि आतंकवादी को संरक्षण देना, आतंकवाद को बढ़ावा देने के बराबर है और यह सभी देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है कि ऐसे तत्व तथा ऐसे देश अपने इरादों में कभी सफल न हो सकें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवादी हिंसा करने, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने और वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए लगातार नए तरीके खोज रहे हैं और साइबर अपराध के उपकरणों का इस्तेमाल करके वह अपनी पहचान छुपाकर चरमपंथ की सामग्री फैला रहे हैं। शाह ने कहा, ‘निस्संदेह, आतंकवाद वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरा है. लेकिन मेरा मानना है कि आतंकवाद का वित्तपोषण आतंकवाद से भी ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इस तरह के वित्तपोषण से आतंकवाद के साधन और तरीके पोषित होते हैं। इसके अलावा, आतंकवाद का वित्तपोषण दुनिया के देशों की अर्थव्यवस्था को कमजोर करता है। उन्होंने कहा, ‘हम यह भी मानते हैं कि आतंकवाद के खतरे को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समूह से नहीं जोड़ा जा सकता है।’

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राजधानी दिल्ली स्थित होटल ताज पैलेस में आतंकवाद-रोधी वित्तपोषण पर ‘आतंक के लिए कोई धन नहीं’ (नो मनी फॉर टेरर) विषय पर आयोजित तीसरे मंत्रिस्तरीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए गृह मंत्री शाह ने कहा कि आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए भारत ने सुरक्षा ढांचे के साथ-साथ कानूनी और वित्तीय प्रणालियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। पाकिस्तान पर परोक्ष रूप से हमला करते हुए उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से कुछ देश ऐसे भी हैं, जो आतंकवाद से लड़ने के लिए सामूहिक प्रयासों को कमजोर और नष्ट करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘कुछ देश आतंकवादियों का बचाव करते हैं और उन्हें पनाह भी देते हैं। आतंकवादी को संरक्षण देना, आतंकवाद को बढ़ावा देने के बराबर है। यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि ऐसे तत्व और ऐसे देश, अपने इरादों में कभी सफल न हो सकें।’ केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि भारत का मानना है कि टेररिज्म से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका, इंटरनेशनल कोऑपरेशन और राष्ट्रों के बीच रियल-टाइम तथा ट्रांसपेरेंट सहयोग ही है। श्री शाह ने कहा कि प्रत्यर्पण, अभियोजन, इंटेलिजेंस शेयरिंग, कैपेसिटी बिल्डिंग तथा “कॉम्बैटिंग दी फाइनेंसिंग ऑफ़ टेररिज्म”, जैसे क्षेत्रों में देशों के बीच सहयोग, टेररिज्म से मुकाबला करने में महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह देखते हुए कि टेररिस्ट और टेररिस्ट समूह, आसानी से सीमाओं के पार, संसाधनों का समन्वय और संयोजन करते हैं, हमारा आपसी सहयोग और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

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