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देव में कबाड़खानों के संचालन पर सवाल, लाइसेंस और एनओसी को लेकर उठे सवाल

औरंगाबाद के देव में आबादी और मुख्य सड़क के किनारे संचालित कबाड़खानों को लेकर स्थानीय लोगों ने लाइसेंस, प्रदूषण और फायर सेफ्टी नियमों के पालन पर सवाल उठाए हैं।

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Media Darshan संवाददाता, Media Darshan
15 अक्टूबर 2026, 06:10 PM IST (9 घंटे पहले) अपडेट: 16 अक्टूबर 2026, 12:16 AM IST
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मीडिया दर्शन, देव (औरंगाबाद)। औरंगाबाद जिले के देव नगर क्षेत्र में घनी आबादी और मुख्य सड़क के किनारे संचालित हो रहे कुछ कबाड़खानों को लेकर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं। आरोप है कि इन कबाड़खानों के पास देव नगर पंचायत का ट्रेड लाइसेंस, प्रदूषण नियंत्रण विभाग की अनुमति/एनओसी और अग्निशमन विभाग की आवश्यक अनुमति उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद यहां बड़े पैमाने पर कबाड़ का भंडारण और खरीद-बिक्री की जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आबादी वाले इलाके में भारी मात्रा में लोहे, प्लास्टिक और अन्य कबाड़ का भंडारण होने से प्रदूषण के साथ-साथ आग लगने की स्थिति में आसपास के घरों और लोगों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है। लोगों ने संबंधित विभागों से पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

कबाड़ के भंडारण और निस्तारण को लेकर सवाल

स्थानीय लोगों के अनुसार, कबाड़खानों में लोहे और प्लास्टिक के अलावा विभिन्न प्रकार की सामग्री जमा की जाती है। आरोप है कि कचरे के सुरक्षित भंडारण और निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने के कारण आसपास के क्षेत्र में गंदगी और प्रदूषण की स्थिति पैदा हो रही है।

लोगों ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े नियमों के पालन को लेकर भी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि कबाड़ के संग्रह, भंडारण और प्रसंस्करण से संबंधित आवश्यक अनुमति और पर्यावरणीय नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं, इसकी संबंधित विभाग को जांच करनी चाहिए।

ट्रेड लाइसेंस और कर भुगतान की जांच की मांग

कबाड़खानों के संचालन को लेकर नगर पंचायत से ट्रेड लाइसेंस और अन्य जरूरी दस्तावेज होने या नहीं होने पर भी सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर बिना आवश्यक नगर निकाय अनुमति के व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

लोगों ने यह भी मांग की है कि नगर पंचायत स्तर से इन प्रतिष्ठानों के लाइसेंस, होल्डिंग टैक्स और अन्य करों से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाए। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

जीएसटी और श्रम नियमों के पालन पर भी सवाल

स्थानीय लोगों ने कबाड़ की खरीद-बिक्री में बिल और अन्य दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कुछ कारोबार में बड़े पैमाने पर नकद लेन-देन किया जाता है। हालांकि, जीएसटी चोरी के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

इसी तरह कबाड़खानों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते हैं। बाल श्रम से जुड़े आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की पुष्टि के लिए श्रम विभाग द्वारा जांच की आवश्यकता है।

चोरी के सामान की खरीद के आरोप

स्थानीय लोगों ने कुछ कबाड़खानों पर चोरी के सामान की खरीद किए जाने का आरोप भी लगाया है। उनका दावा है कि बिजली के तार, सरकारी नल के पाइप और लोहे के एंगल जैसी सामग्री भी कबाड़ के रूप में खरीदी जाती है।

हालांकि, चोरी के सामान की खरीद या किसी कबाड़खाने के आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे मामलों में पुलिस जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है। स्थानीय लोगों ने पुलिस से कबाड़ की खरीद-बिक्री और संदिग्ध सामग्री की जांच कराने की मांग की है।

आग लगने की स्थिति में बड़ा खतरा

कबाड़खानों में बड़ी मात्रा में ज्वलनशील और अन्य सामग्री जमा होने के कारण अग्नि सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि घनी आबादी के बीच स्थित किसी कबाड़खाने में आग लगती है तो आसपास के घरों तक आग फैलने का खतरा हो सकता है।

लोगों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर अग्निशमन उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अग्निशमन विभाग से इन स्थानों का निरीक्षण कराने और सुरक्षा मानकों की जांच करने की मांग की गई है।

प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग

कबाड़खानों के संचालन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच स्थानीय लोगों ने औरंगाबाद जिला प्रशासन, देव नगर पंचायत, प्रदूषण नियंत्रण विभाग, अग्निशमन विभाग और पुलिस प्रशासन से संयुक्त रूप से जांच कराने की मांग की है।

लोगों का कहना है कि यदि किसी कबाड़खाने के पास आवश्यक लाइसेंस या अनुमति नहीं है अथवा पर्यावरण, अग्नि सुरक्षा, कर और श्रम संबंधी नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित संचालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

फिलहाल इन आरोपों पर संबंधित कबाड़खाना संचालकों या संबंधित विभागों का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। विभागीय जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि देव में संचालित कबाड़खाने नियमों के अनुरूप चल रहे हैं या नहीं।