मीडिया दर्शन/सिमरिया: राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 118वीं जयंती के समापन अवसर पर गुरुवार को सिमरिया में साहित्य और कविता का भव्य संगम देखने को मिला। दिनकर स्मृति विकास समिति के तत्वावधान में आयोजित विराट कवि सम्मेलन में देश-समाज, प्रेम, किसान और वर्तमान व्यवस्था से जुड़े विषयों पर कवियों ने अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी। देर रात तक चले इस काव्य आयोजन में श्रोता कविताओं पर तालियां बजाते नजर आए।
कवियों ने अपनी रचनाओं से बांधा समां
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि अशांत भोला ने की। उन्होंने अपने मुक्तकों के जरिए श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी। कवि प्रफुल्ल मिश्र ने दोस्ती की भावनाओं को अपनी रचना के माध्यम से सामने रखा, जबकि गीतकार रामा मौसम ने बचपन की यादों और संवेदनाओं से जुड़ा गीत प्रस्तुत कर माहौल को भावुक कर दिया।
लोक गायक सच्चिदानंद पाठक ने अपनी कविताओं के जरिए बदलते सामाजिक मूल्यों और व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनकी रचनाओं को श्रोताओं ने खूब सराहा। शैलेंद्र शर्मा त्यागी ने किसानों की समस्याओं और सूखे की स्थिति को कविता के माध्यम से आवाज दी।
प्रोफेसर रामाज्ञा शशिधर की किसान जीवन पर केंद्रित प्रस्तुति ने श्रोताओं को भावुक कर दिया। उनकी कविता में खेत, किसान और ग्रामीण जीवन की चुनौतियों को प्रभावी ढंग से सामने रखा गया।
इसके अलावा अनिल पतंग, रंजू ज्योति, अजय कुमार सिंह, चंद्रप्रभा देवी, श्रीकांत शर्मा, विश्व भूषण गुप्ता, इंजीनियर कन्हाई पंडित, उमेश कुमार कवि, विद्यासागर ब्रह्मचारी, पुष्कर प्रसाद सिंह, ललन लालित्य, पूनम कुमारी, विनोद बिहारी, उत्सव कोष, अंकित कुमार, संजीव फिरोज और प्रियव्रत कुमार सहित कई कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
साहित्य प्रेमियों की रही बड़ी मौजूदगी
युवा कवि ए.के. मनीष ने कवि सम्मेलन का संचालन किया। दिनकर पुस्तकालय के अध्यक्ष विशंभर सिंह ने स्वागत भाषण दिया, जबकि समिति के कोषाध्यक्ष रामनाथ सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
कार्यक्रम में समिति के सचिव प्रदीप कुमार, कृष्ण मुरारी, अमर कुमार, मुखिया प्रतिनिधि गोपाल कुमार, अजीत कुमार, दीनबंधु कुमार, जितेंद्र झा, राधे कुमार, राजेंद्र राय नेताजी, राजेश कुमार सिंह, प्रवीण प्रियदर्शी, सुनील कुमार सिंह, विपिन कुमार राय, राजेश रंजन, शंकर पोद्दार, विजेंद्र पोद्दार, सत्यम कुमार, गोविंद गोपाल और रमन कुमार समेत बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, साहित्य प्रेमी और ग्रामीण मौजूद रहे।
दिनकर जयंती के समापन पर आयोजित इस कवि सम्मेलन ने सिमरिया की साहित्यिक परंपरा और राष्ट्रकवि दिनकर की काव्य विरासत को एक बार फिर मंच प्रदान किया।