डिहरी/सासाराम: त्योहारों का मौसम करीब आते ही बाजार में मिठाइयों और खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने लगी है। इसी बीच रोहतास जिले के डेहरी शहर के औद्योगिक क्षेत्र में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। मंगलवार को एसडीएम निलेश कुमार के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने औद्योगिक क्षेत्र में संचालित मिठाई और सॉस बनाने वाली फैक्ट्रियों में एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान फैक्ट्रियों के अंदर की स्थिति देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए।
प्रशासनिक जांच में एक सॉस फैक्ट्री में बिना टमाटर के टोमैटो सॉस और बिना मिर्च के चिली सॉस तैयार किए जाने का मामला सामने आया। अधिकारियों के अनुसार फैक्ट्री में सॉस तैयार करने के लिए टमाटर और हरी मिर्च का इस्तेमाल होता हुआ नहीं मिला, जबकि टैंकों में बड़ी मात्रा में तैयार टोमैटो और चिली सॉस मौजूद था। प्रारंभिक जांच में सॉस में रंग और विभिन्न प्रकार के केमिकल मिलाकर उसे तैयार किए जाने की बात सामने आई है।
प्रशासन को पिछले कई दिनों से डेहरी औद्योगिक क्षेत्र में संचालित कुछ खाद्य पदार्थ निर्माण इकाइयों के संबंध में लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शिकायतों में मिलावटी और खराब कच्चे माल से मिठाइयां तथा सॉस तैयार कर बाजार में आपूर्ति किए जाने की बात कही गई थी। त्योहारों के मद्देनजर बाजार में खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग को देखते हुए प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया।एसडीएम निलेश कुमार के निर्देश पर प्रशासनिक टीम का गठन किया गया। टीम में अनुमंडलीय निर्वाचन पदाधिकारी सह दंडाधिकारी संतोष कुमार और खाद्य सुरक्षा विभाग के फूड इंस्पेक्टर रोशन कुमार शामिल थे। टीम ने सबसे पहले औद्योगिक क्षेत्र में संचालित एक सॉस फैक्ट्री में छापेमारी की।फैक्ट्री में पहुंची टीम ने जब वहां रखे कच्चे माल और उत्पादन प्रक्रिया की जांच की तो कई सवाल खड़े हो गए। अधिकारियों के मुताबिक फैक्ट्री परिसर में टोमैटो सॉस तैयार करने के लिए आवश्यक मात्रा में टमाटर और चिली सॉस के लिए हरी मिर्च मौजूद नहीं थी। इसके बावजूद टैंकों में दोनों प्रकार के सॉस तैयार मिले।प्रारंभिक जांच में अधिकारियों ने सॉस में रंग और तेज रसायनों के इस्तेमाल की बात कही है। इसके अलावा तैयार सॉस को पुरानी और इस्तेमाल की जा चुकी बोतलों में भरकर बाजार में भेजे जाने की बात भी जांच के दौरान सामने आई। प्रशासन ने मौके से बड़ी संख्या में सॉस की बोतलें जब्त कर उनके नमूने सील किए।
अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में 400 से अधिक सॉस की बोतलें मानकों के विपरीत पाई गईं। साथ ही फैक्ट्री में सड़े-गले कच्चे माल के इस्तेमाल की भी बात सामने आई है। चिली सॉस के निर्माण को लेकर आवश्यक लाइसेंस नहीं होने की जानकारी भी अधिकारियों को मिली है।सॉस फैक्ट्री के बाद प्रशासनिक टीम ने उसके समीप संचालित कामधेनु स्वीट्स और नारायण स्वीट्स की फैक्ट्रियों की भी जांच की। यहां मिठाई तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले कुछ केमिकल एक्सपायरी डेट के पाए गए। इसके अलावा फैक्ट्री परिसर में साफ-सफाई की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं मिली।
त्योहारों के पहले हुई इस कार्रवाई ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट के मुद्दे को एक बार फिर सामने ला दिया है। अब सभी की नजर जांच के लिए भेजे गए खाद्य नमूनों की रिपोर्ट पर है। रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि किन खाद्य पदार्थों में मानकों का उल्लंघन हुआ है और संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ किस स्तर की कानूनी कार्रवाई की जाती है।