रविवार, 20 सितंबर 2026 राँची 29°C
सत्य, निष्पक्ष और सटीक पत्रकारिता - देश का विश्वसनीय डिजिटल न्यूज़ पोर्टल
Media Darshan
ब्रेकिंग न्यूज़
बाल टूटने से हैं परेशान? नारियल तेल में मिलाएं ये 3 चीजें, जानें सही तरीका   •   कौन थे सुदिव्य कुमार सोनू? जानें पूरा सफर   •   2 करोड़ की ‘हनुमान अंश’ ने मचाया तहलका, 100 करोड़ क्लब में एंट्री; ‘सिंघम’ और ‘83’ को छोड़ा पीछे   •   आरा जंक्शन पर बड़ा रेल हादसा टला, महानंदा एक्सप्रेस के दो कोच पटरी से उतरे; कई ट्रेनें प्रभावित   •   बाल टूटने से हैं परेशान? नारियल तेल में मिलाएं ये 3 चीजें, जानें सही तरीका   •   कौन थे सुदिव्य कुमार सोनू? जानें पूरा सफर   •   2 करोड़ की ‘हनुमान अंश’ ने मचाया तहलका, 100 करोड़ क्लब में एंट्री; ‘सिंघम’ और ‘83’ को छोड़ा पीछे   •   आरा जंक्शन पर बड़ा रेल हादसा टला, महानंदा एक्सप्रेस के दो कोच पटरी से उतरे; कई ट्रेनें प्रभावित   •  

क्या तेजस्वी यादव की ‘अकेले चुनाव’ चुनौती हकीकत है या सियासी रणनीति?

पटना: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भाजपा-जदयू गठबंधन को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि अगर अकेले-अकेले चुनाव लड़ना है तो “फरियाइए, हैसियत का पता चल जाएगा।” उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। सवाल उठ रहा है कि क्या

S
satyam kumar sinha संवाददाता, Media Darshan
19 फरवरी 2026, 11:33 AM (19 फरवरी 2026) 239 व्यूज
शेयर करें:
WhatsApp X (Twitter) Facebook

पटना: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भाजपा-जदयू गठबंधन को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि अगर अकेले-अकेले चुनाव लड़ना है तो “फरियाइए, हैसियत का पता चल जाएगा।” उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। सवाल उठ रहा है कि क्या राजद वास्तव में अकेले दम पर बहुमत हासिल कर सकता है, या यह सिर्फ राजनीतिक दबाव की रणनीति है?

इतिहास पर नजर डालें तो तस्वीर आसान नहीं दिखती। पिछड़ों के बड़े नेता माने जाने वाले लालू प्रसाद यादव भी राजद गठन के बाद कभी अपने दम पर बहुमत नहीं ला सके। वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में, जब बिहार अविभाजित था और कुल 324 सीटें थीं, राजद ने 293 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन उसे केवल 124 सीटें मिलीं—बहुमत से 39 कम। बाद में कांग्रेस और निर्दलीयों के समर्थन से राबड़ी देवी की सरकार बनी।

झारखंड गठन के बाद विधानसभा 243 सीटों की रह गई, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता जारी रही। फरवरी 2005 में राजद 75 सीटों पर सिमट गया और अक्टूबर 2005 में सत्ता से बाहर हो गया। उसी दौर में बिहार की राजनीति बहुध्रुवीय हो चुकी थी—राजद, जदयू और भाजपा अलग-अलग ध्रुव के रूप में उभरे। खंडित जनादेश ने गठबंधन राजनीति को अनिवार्य बना दिया।

ऐसे में तेजस्वी यादव की ‘अकेले चुनाव’ की चुनौती को राजनीतिक आत्मविश्वास और रणनीतिक दबाव—दोनों नजरियों से देखा जा रहा है। क्या यह महागठबंधन के भीतर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश है, या वाकई राजद अकेले मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है? बिहार की बदलती सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के बीच यह सवाल फिलहाल खुला है।

लखनऊ में योगी-भागवत मुलाकात से सियासी चर्चा तेज, डिप्टी सीएम से भी अलग-अलग बैठक

SUBSCRIBE OUR CHANNEL :- MEDIA DARSHAN

पाठकों की प्रतिक्रियाएं (0)

अपनी राय साझा करें

इस खबर पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली प्रतिक्रिया आप दें!