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बिहार राज्यसभा चुनाव: क्या कांग्रेस विधायक तेजस्वी के साथ करेंगे ‘खेला’?

बिहार में आगामी राज्यसभा चुनाव से पहले महागठबंधन के भीतर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के तीन विधायकों की भूमिका को लेकर सस्पेंस बना हुआ है, जिससे गठबंधन के नेताओं की चिंता बढ़ गई है। फिलहाल प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व अपने विधायकों को एकजुट रखने

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satyam kumar sinha संवाददाता, Media Darshan
12 मार्च 2026, 07:20 PM IST (12 मार्च 2026) अपडेट: 25 अक्टूबर 2026, 01:59 PM IST
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बिहार में आगामी राज्यसभा चुनाव से पहले महागठबंधन के भीतर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के तीन विधायकों की भूमिका को लेकर सस्पेंस बना हुआ है, जिससे गठबंधन के नेताओं की चिंता बढ़ गई है। फिलहाल प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में लगा हुआ है, लेकिन सहयोगी दलों को पूरी तरह आश्वस्त नहीं किया जा सका है।

दरअसल, राज्यसभा चुनाव के लिए Rashtriya Janata Dal ने अपना उम्मीदवार मैदान में उतार दिया है। ऐसे में जीत सुनिश्चित करने के लिए महागठबंधन के सभी दलों के विधायकों का समर्थन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में एक-एक वोट की अहमियत बढ़ गई है, क्योंकि इस बार मुकाबला कड़ा होने के संकेत मिल रहे हैं।

इसी रणनीति को लेकर बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने महागठबंधन के नेताओं और विधायकों की अहम बैठक बुलाई थी। बैठक का मकसद राज्यसभा चुनाव के लिए साझा रणनीति बनाना और सभी सहयोगी दलों को एकजुट रखना था। हालांकि पार्टी निर्देश के बावजूद कांग्रेस के तीन विधायक इस बैठक में शामिल नहीं हुए, जिससे राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें शुरू हो गईं।

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हालांकि कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता Asit Nath Tiwari ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी के भीतर किसी तरह की नाराजगी नहीं है। उनके मुताबिक, जिन विधायकों ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया, उन्होंने रोजा होने का हवाला देते हुए अपनी असमर्थता जताई थी। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्षी दल इस मुद्दे को बेवजह तूल दे रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में विधायकों की एकजुटता बेहद अहम होती है। यदि गठबंधन के किसी भी दल का विधायक अलग रुख अपनाता है, तो चुनावी गणित प्रभावित हो सकता है।

बताया जा रहा है कि इस बार राज्यसभा की पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे एक सीट पर सीधा मुकाबला तय माना जा रहा है। ऐसे में महागठबंधन की कोशिश है कि सभी सहयोगी दल एकजुट रहें और साझा उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित हो सके।

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