पीरो (भोजपुर):- आजादी के बाद सूबे में कितनी बार सता व सरकारें बदली पर तरारी क्षेत्र की न तो तस्वीर बदली और न यहां के लोगों की तकदीर ।कभी कालापानी के नाम से चर्चित जिले के सुदूर दक्षिण इलाके में अवस्थित तरारी विधानसभा क्षेत्र की अबतक अनदेखी की जाती रही ऐसे में आज भी यहां समस्याओं का अंबार है ।
(1) टूटी सडकें – वैसे तो सूबे की सरकार द्वारा सडकों की जाल बिछा दिए जाने के दावे किए जा रहे हैं पर तल्ख सच्चाई यह है कि तरारी तक जाने वाली तमाम सडकों की स्थिति खास्ताहाल है । चाहे कुरमुरी से नहर के समानांतर तरारी प्रखंड मुख्यालय तक जाने वाली सडक हो या भाया सेदहा तरारी सडक का सूरतहाल । या फिर भाया जेठवार करथ तरारी पथ की स्थिति किसी से छुपी नहीं है । ये सडकें इस काबिल नहीं है कि कोई वाहन बैलगाडी से ज्यादा रफतार में दौड सके ।
(2) ऐन वक्त पर नहरें दे जाती हैं किसानों को धोखा – तरारी विधानसभा क्षेत्र में सहार, तरारी व पीरो प्रखंड के जो इलाके शामिल हैं वहां सिचाई के लिए नहरें तो हैं लेकिन ये अक्सर वक्त पर किसानों को धोखा दे जाती हैं । खासकर खरीफ सीजन में जब खेतों के पटवन की जरूरत होती हैं तब यहां की नहरें खुद पानी के लिए तरसती हैं । समुचित रख रखाव व मरम्मती के अभाव में नहरों के टूटे तटबंध रबी मौसम में किसानों के लिए अभिशाप बन जाते हैं तब नहर का पानी अनावश्यक रूप से खेतों में जमा होकर अच्छी रबी फसल पाने के अरमानों पर पानी फेर देता है ।(कालापानी के नाम से)
(3) नहीं सृजित किए गए रोजगार के साधन
जिले के इस सुदूरवर्ती इलाके में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या बनी हुई है । यहां के प्रतिनिधि भले इस क्षेत्र को रोजगार का हब बनाने की बातें करते हो पर जमीनी हकीकत यह है कि यहां आजतक सूई का एक कारखाना भी नहीं लगाया गया । ऐसे में बेरोजगारी का दंश झेल रहे यहां के युवा कभी नक्सली गतिविधियों में लिप्त हुए तो कभी अपराध का सहारा लेने को विवश हो गए ।युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार की तमाम कवायदें यहां कागजों तक सिमट कर रह गई ।
(4) बदहाल शिक्षा व्यवस्था — तरारी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत सहार व तरारी प्रखंडों में शिक्षा व्यवस्था बदतर स्थिति में है । सरकारी प्राथमिक व मध्य विद्यालयों की स्थिति यह है कि यहां बच्चे व शिक्षक स्लेट की प्लेट में ही उलझ कर रह गए हैं । हाई स्कूलों के हालात भी कम बदतर नहीं है वही उच्च शिक्षा के लिए क्षेत्र के प्रतिभाओं को आज भी बडे शहरों का रूख करना पडता है । तकनीकी शिक्षा के लिए यहां आईटीआई या ऐसे दूसरे संस्थानों का अभाव यहां के लोगों को खटकता है ।
अपर समाहर्ता विभागीय जाँच को दी गई विदाई
(5) ईलाज को नीम हकीमों के भरोसे रहना पडता है लोगों को – कहने को तो तरारी विधानसभा क्षेत्र में चार पांच सीएचसी, एपीएचसी व दर्जनों उप स्वास्थ्य केन्द्र स्थापित हैं लेकिन इनमें से अधिकांश स्वास्थय केंद्र साधनों व चिकित्सकों के अभाव में खुद बीमार हैं । नब्बे प्रतिशत स्वास्थय उप केन्द्रों के ताले शायद ही कभी खुलते हैं । प्रखंड मुख्यालयों में स्थापित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति कुछ खास अच्छी नहीं है । यहां चिकित्सकों की कमी और संसाधनों का अभाव आज भी यथावत बरकरार है । ऐसे में क्षेत्र के लोगों को नीम हकीमों के भरोसे रहना पडता है ।
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