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नई दिल्ली: ‘मेरी आवाज़ ही पहचान है गर याद रहे’ के गायक भुपिंदर सिंह नहीं रहे

नई दिल्ली। देश दुनिया के प्रसिद्ध गायक भूपेंद्र सिंह ने दिल ढूंढ़ता है फिर वही, एक अकेला इस शहर’, ‘किसी नजर को तेरा इंतजार आज भी है’, ‘होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा’ जैसे गानों से  श्रोताओं के बीच अपना  मुकाम बनाया। उनके निधन से संगीत जग

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satyam kumar sinha संवाददाता, Media Darshan
19 जुलाई 2022, 04:08 PM IST (19 जुलाई 2022) अपडेट: 26 अक्टूबर 2026, 09:31 PM IST
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नई दिल्ली। देश दुनिया के प्रसिद्ध गायक भूपेंद्र सिंह ने दिल ढूंढ़ता है फिर वही, एक अकेला इस शहर’, ‘किसी नजर को तेरा इंतजार आज भी है’, ‘होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा’ जैसे गानों से  श्रोताओं के बीच अपना  मुकाम बनाया। उनके निधन से संगीत जगत को अपूर्णीय क्षति हुई है।(नई दिल्ली: ‘मेरी आवाज़ ही)

गजल गायक भूपेंद्र सिंह का जन्म 6 फरवरी, 1940 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था। उनके पिता नत्था सिंह पेशे से एक प्रोफेसर और   मर्मज्ञ  थे।  भूपेंद्र सिंह को संगीत के क्षेत्र में उनके  पहले गुरू उनके पिता ही थे। भूपेंद्र के पिता एक बेहतरीन म्यूजिक डायरेक्टर भी थे। नत्था सिंह संगीत की बारीकियों को लेकर अक्सर भूरेंद्र को सलाह दिया करते   थे।  इसको लेकर एक समय ऐसा भी आया जब भूपिंदर का ध्यान संगीत से भटकने लगा था। हालांकि संगीत मय परिवार का सदस्य होने के नाते म्यूजिक से ज्यादा समय तक दूर नहीं रह सके।(नई दिल्ली: ‘मेरी आवाज़)

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भूपिंदर ने संगीत को ही अपना कैरियर बनाने को सोंचा । भूपेंद्र ने अपने करियर की शुरुआत  आकाशवाणी में गायन से की । भूपिंदर को ग़ज़ल गायिकी के अलावा वायलिन और गिटार बजाने में भी महारत हाशिल था  और वे आकाशवाणी दिल्ली में कार्यरत थे। एक कार्यक्रम के दौरान इनके प्रस्तुति देखकर ही संगीतकार मदन मोहन ने भूपेंद्र सिंह को फिल्म ‘हकीकत’ में मौका दिया, इसमें उन्होंने मोहम्मद रफी,,मन्ना डे और तलत महमूद के साथ जुगलबंदी में  ‘होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा’ गाने में अपनी गायिकी का हुनर दिखाया था। यह गाना उस दौर का सुपर डूपर हिट गीत साबित हुआ।
उसके बाद एक के बाद एक कई हिट सांग गाये उनमें  मेरी आवाज ही पहचान है, गर याद रहे।’  दिल ढूंढ़ता है फिर वही’, ‘एक अकेला इस शहर’, ‘किसी नजर को तेरा इंतजार आज भी है’, ‘होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा’,  जैसे ग़ज़लो को  अपनी आवाज़ देकर भूपेंद्र सिंह ने इन नज़म को अमर कर दिया है। उनके गाए गीतों ने संगीत की दुनिया में एक अलग मुकाम बनाया है। एक दो गीतों में गायन के साथ अभिनय भी किया पर इन्हें अभिनय रास नहीं आया।  ग़ज़ल गायक  भूपेंद्र सिंह का मुंबई के एक अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया है उनके निधन से संगीत जगत को अपूर्णीय क्षति हुई है।(नई दिल्ली: ‘मेरी आवाज़)

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