बिहार में वायु प्रदूषण का स्तर काफी अधिक दर्ज होने और देश के सबसे प्रदूषित आबो-हवा वाले इलाकों की सूची में बिहार के कई जिलों का नाम सामने आने के बाद अब इस स्थिति में सुधार के लिए व्यापक प्रयास आरंभ हो गया है। बिहार को जहरीली हवाओं से मुक्ति दिलाने का उपाय सुझाने के लिए आईआईटी कानपुर आगे आया है और बताया जा रहा है कि कानपुर आइआइटी यहां से ही बिहार की बिगड़ी हवा को सुधारेगा। बिहार में प्रदूषण की स्थिति पर समुचित निगरानी के लिए प्रदेश भर में 550 पोर्टेबल एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग सैंपलर लगाए जाएंगे जिसका प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहयोग से संचालन होगा और इसमें 24 घंटे में ही रिपोर्ट भी मिला करेगी। यह सैंपलर अत्याधुनिक हैं। इनसे न सिर्फ शहरी, ग्रामीण क्षेत्रों के प्रदूषण के कारकों का पता चलेगा, बल्कि बाहर से आने वाली गैसों की निगरानी की जा सकेगी। चुंकि वायु प्रदूषण का असर काफी दूर तक रहता है इसलिए बाहर से आने वाली हवाओं पर निगरानी करना ही आवश्यक है। आईआईटी कानपुर के उच्च पदस्थ अधिकारियों ने बताया है कि एक सैंपलर से पांच किलोमीटर के क्षेत्र का हाल पता लग सकेगा। यह आवासीय, औद्योगिक, व्यवसायिक, भीड़भाड़ और हाईवे वाले क्षेत्रों में स्थापित किए जाएंगे, जिससे सभी जगहों के प्रदूषण की जानकारी मिल पाएगी।
दरअसल आईआईटी कानपुर के सहयोग से बिहार में धूल, गर्द, अतिसूक्ष्म तत्व और हानिकारक गैसों के असर से बिगड़ी फिजा को सुधारने की कवायद चल रही है। यहां के विशेषज्ञ न सिर्फ सभी जिलों के वायु गुणवत्ता सूचकांक पर नजर रखेंगे, बल्कि उसको सही करने का ठोस प्लान बनाएंगे। बताया जा रहा है कि आईआईटी कानुपर की ओर से प्रदेश भर में 550 पोर्टेबल एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग सैंपलर लगाने की तैयारी है। इन्हें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहयोग से संचालित किया जाएगा, जिससे 24 घंटे मॉनीटरिंग होगी। संस्थान के सिविल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, तमिलनाडु, राजस्थान आदि राज्यों के वायु प्रदूषण पर नजर रखी जा रही है। यहां के प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी, प्रो. मुकेश शर्मा और अन्य अधिकारियों की टीम हवा की गुणवत्ता के साथ ही वायु प्रदूषण फैलाने वाले कारकों की जांच कर रही है। सिर्फ इतना ही नहीं समस्या को दूर करने का खाका खींचा जा रहा है। वाहन, पराली, कोयला, कचरा आदि के जलाने से निकले धुएं पर अंकुश लगाने के प्रयास चल रहे हैं। वायु प्रदूषण की यही स्थिति बिहार में भी आ रही है। वायु गुणवत्ता सूचकांक बिगड़ने लगा है। सर्दियों की शुरूआत में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मॉनीटरिंग स्टेशनों से आ रही रिपोर्ट चौंकाने वाली है। प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी और उनकी टीम को मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी मिली है। आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रों. त्रिपाठी का कहना है कि बिहार के विभिन्न जिलों में जो 550 पोर्टेबल एयर क्वालिटी मॉनीटरिंग सैंपलर लगाए जाएंगे वह ना सिर्फ चौबीसों घंटे हवा की गुणवत्ता बताएंगे बल्कि इनसे वायु प्रदूषण की असली वजह का भी पता चल सकेगा और उसके आधार पर प्रदूषण के स्तर को कम करने की कार्ययोजना बनाने व उसे लागू करने में भी सहूलियत होगी।
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