शनिवार, 19 सितंबर 2026 राँची 29°C
सत्य, निष्पक्ष और सटीक पत्रकारिता - देश का विश्वसनीय डिजिटल न्यूज़ पोर्टल
Media Darshan
ब्रेकिंग न्यूज़
बाल टूटने से हैं परेशान? नारियल तेल में मिलाएं ये 3 चीजें, जानें सही तरीका   •   कौन थे सुदिव्य कुमार सोनू? जानें पूरा सफर   •   2 करोड़ की ‘हनुमान अंश’ ने मचाया तहलका, 100 करोड़ क्लब में एंट्री; ‘सिंघम’ और ‘83’ को छोड़ा पीछे   •   आरा जंक्शन पर बड़ा रेल हादसा टला, महानंदा एक्सप्रेस के दो कोच पटरी से उतरे; कई ट्रेनें प्रभावित   •   बाल टूटने से हैं परेशान? नारियल तेल में मिलाएं ये 3 चीजें, जानें सही तरीका   •   कौन थे सुदिव्य कुमार सोनू? जानें पूरा सफर   •   2 करोड़ की ‘हनुमान अंश’ ने मचाया तहलका, 100 करोड़ क्लब में एंट्री; ‘सिंघम’ और ‘83’ को छोड़ा पीछे   •   आरा जंक्शन पर बड़ा रेल हादसा टला, महानंदा एक्सप्रेस के दो कोच पटरी से उतरे; कई ट्रेनें प्रभावित   •  

90 डॉलर से नीचे फिसली कच्चे तेल की कीमत, जानिए गिरावट के पीछे की तीन बड़ी वजहें

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में हाल के दिनों में तेज गिरावट देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है, जिससे वैश्विक बाजार में हलचल मच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई आर्थि

S
satyam kumar sinha संवाददाता, Media Darshan
10 मार्च 2026, 05:51 AM (10 मार्च 2026) 587 व्यूज
शेयर करें:
WhatsApp X (Twitter) Facebook

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में हाल के दिनों में तेज गिरावट देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है, जिससे वैश्विक बाजार में हलचल मच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई आर्थिक और भू-राजनीतिक कारण जिम्मेदार हैं।

Image

1. मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद
तेल की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में तनाव कम होने की संभावनाएं बताई जा रही हैं। पिछले कुछ समय से क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई थी, जिससे कीमतें ऊपर चली गई थीं। लेकिन अब हालात कुछ हद तक स्थिर होते दिख रहे हैं, जिससे निवेशकों की चिंता कम हुई है और कीमतों पर दबाव पड़ा है।

2. वैश्विक मांग में कमी के संकेत
दूसरा बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर तेल की मांग में कमजोरी है। अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे बड़े बाजारों में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी होने के संकेत मिल रहे हैं। इससे तेल की खपत पर असर पड़ रहा है और कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है।

Image

क्या है ‘ब्लू बुक’ प्रोटोकॉल? राष्ट्रपति के दौरे से जुड़े नियमों को लेकर क्यों उठ रहा है विवाद 

3. तेल उत्पादन में बढ़ोतरी
तीसरी वजह कुछ बड़े तेल उत्पादक देशों की ओर से उत्पादन बढ़ाना है। जब बाजार में आपूर्ति बढ़ती है और मांग स्थिर रहती है, तो कीमतों में गिरावट आना स्वाभाविक है। ओपेक और अन्य तेल उत्पादक देशों की नीतियों का भी कीमतों पर असर पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल तेल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। हालांकि, अगर मध्य पूर्व में हालात पूरी तरह शांत रहते हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार होता है, तो कीमतों में फिर से तेजी भी देखी जा सकती है। फिलहाल तेल बाजार निवेशकों और सरकारों दोनों के लिए सतर्कता का संकेत दे रहा है।

SUBSCRIBE OUR CHANNEL :- MEDIA DARSHAN

पाठकों की प्रतिक्रियाएं (0)

अपनी राय साझा करें

इस खबर पर अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। पहली प्रतिक्रिया आप दें!