कोरोना मुक्ति और आरोग्य का वर मांग छठ व्रत संपन्न

Spread the love

पटना। चैत मास में होने वाले वासंती छठ व्रतियों ने उगते सूरज को अर्घ देकर  कोरोना रोग से मुक्ति के साथ पूरे परिवार को  रोग मुक्त रहने की आराधना की गई।इस विपदा की घड़ी में आई छठ व्रत में, ना घरों में,  ना गंगा घाटों पर, लोकप्रिय छठ गीत सुनाई दिए। गंगा के घाटों पर प्रशासन द्वारा मनाही को लेकर लोग घर पर ही जो सामग्री पूजा हेतु मिला उसी से पूजा अर्चना की। बिहार सूर्योपासना का यह पर्व संतान प्राप्ति के अलावा सभी प्रकार के रोगों से अपने बच्चों को मुक्ति के लिए बरसों से मनाता रहा है । सभी की उत्पत्ति करने वाले,  उन्हें  पालने वाले शक्ति से भरे भगवान  सूर्य अपने 12  स्वरूपो से संसार का संचालन करते हैं।  इस कारण महाभारत काल में भी द्रौपदी ने छठ व्रत किया था। संतान हीन को संतान प्राप्ति एवं रोगी काया को रोग से मुक्ति हेतु यह पर्व धीरे-धीरे संसार के कई भागों में मनाया जाता है । माना जाता है कि इस निर्जला व्रत में सूर्योपासना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति जरूर होती है। हालांकि कोरोना वायरस पूरा शहर  लॉकडाउन झेल रहा है ,किंतु इस बीच सोमवार को अस्ताचलगामी सूर्य देवता को सर्वार्थ सिद्धि योग में  अध्य दिया तथा मंगलवार को चैत्र शुक्ल सप्तमी को द्विपुष्कर योग में उदयागामी सूर्य देवता की पूजा अर्चना कर छठ व्रत संपन्न हुआ। लॉकडाउन की स्थिति में सरकार द्वारा सख्त निर्देश दिया गया था कि किसी भी सामूहिक जगह पर पूजा अर्चना नहीं होगी |यही कारण है कि व्रतियों ने अपने – अपने घरों के छतों पर ही अध्य देंना मुनासिब समझा। राजधानी पटना सहित सभी जगहों पर छठ व्रत लोगो ने अपने-अपने घरों में ही मनाया। उधर हिंदुस्तान के तीसरे बड़े आर्क स्थल उलार में मात्र 2 लोगों ने ही अध्य  दिया । 75 वर्षीय महंत अवध बिहारी दास महाराज जी ने कहा इतिहास में पहली बार लोक आस्था के महापर्व पर उलार में जन सैलाब नहीं उमड़ी। इस पर्व में 5 – 6 लाख लोग जमा होते थे। उलार में मात्र 2 लोग बाडीचक गांव के मीना देवी व उलार गांव का 70 वर्षीय वकील सिंह ने अर्ध दिया।  दूसरी ओर औरंगाबाद के देव मंदिर व सूरजकुंड में सन्नाटा छाया रहा। वहां भी लॉकडॉउन के कारण छठ व्रत नहीं हुआ। सभी लोग अपने – अपने छतों पर ही उदयाचलगामी सूर्य को अर्ध्य देकर 36 घंटे से  जारी निर्जला व्रत को तोड़कर छठ व्रत संपन्न किया।
-धर्मवीर कुमार

Spread the love

MediaDarshan

Read Previous

क्या भगवान एक अच्छी राहत है?

Read Next

एक्वेरियम: परिवार की सुख-समृद्धि में वृद्धि के साथ-साथ खुशनुमा माहौल बनाता है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *