गरीब के साथ मध्यमवर्गीय परिवार को भी है मदद की दरकार

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हाजीपुर। कोरोना जैसी घातक बीमारी से निपटने के लिए केन्द्र सरकार पूरे देश में लाॅकडाउन कर लोगों को अपने घर में ही रहने का निर्देश दिया है। उसका पालन भी लोग बराबर कर रहे है। लाॅकडाउन की 16 दिन बीत चुके है। कई व्यक्ति जो प्रायवेट संस्था, मजदूरी करके, किराना दुकान में, अखबार में काम करके, प्रायवेट स्कूल में, कई ऐसी प्रायवेट जगह, मजदूरी कर जहां भी काम मिला है वहां अपने कार्य का बखूबी निर्वहन कर वह अपने परिवार का पालन पोषण करता है। ऐसे में लाॅकडाउन से उसका कार्य बंद हो गया है। क्या उसे उसकी मजदूरी, तनख्वाह, मानदेय वास्तविकता में मिल पायेगा या नहीं ये भविष्य के गर्त में छिपा है। वैसे भारत सरकार के साथ ही शासन-प्रशासन निर्देश है कि उन्हें इस बीच का वेतन, मजदूरी, तनख्वाह जरूर मिलेगी। पर यहां विचारणीय है क्या मजदूरी,  तनख्वाह, मानदेय नहीं मिल पाया तो तब क्या होगा । बीपीएल धारी हर परिवार के लिए भारत सरकार व शासन ने हर संभव मदद के साथ ही उनका राशन का इंतजाम करने की बात कही है जो सराहनीय कदम है और होना भी चाहिये। लेकिन यहां हमने पाया कि हर व्यक्ति बीपीएल कूपन धारी नहीं हो सकता है कई मध्यमवर्गीय परिवार ऐसे है जिनकी हालात बीपीएल धारी से कम नहीं है वो व्यक्ति जो किसी प्रायवेट संस्था में कार्य कर इस महंगाई जमाने में जैसे तैसे अपने परिवार का पालन पोषण करता है। वैसे उसको इन प्रायवेट संस्थाओं से मिलने वाली मजदूरी, तनख्वाह, मानदेय आज की महंगाई को देखते हुए ऊंट के मुंह में जीरे के समाने होती है उसके बाद भी वो जैसे तैसे अपने परिवार का पालन पोषण करता है। ऐसे में विचार आता है कि क्या शासन प्रशासन ऐसे मध्यमवर्गीय परिवार को भी राशन के साथ ही गैस की टंकी व अन्य साधन निःशुल्क रूप से उपलब्ध करवा पायेगा। वहीं उन लोगों का क्या होगा जो रोजाना मजदूरी करके होनी वाली कमाई से अपना घर चलाते है जो किसी गरीब परिवार नहीं होते हुए, बीपीएल धारी नहीं होते हुए मध्यमवर्गीय परिवार से होते है लेकिन उनकी हालात गरीबों से बदतर होती है उनका कौन ध्यान रखेगा।शहर सहित जिले में कई परिवार ऐसे है जिनके अपने स्वयं के मकान है, उनकी गरीब से भी बदतर स्थिति है कहीं कहीं तो देखने में आया है कि उनको खाने के लाले पड़ते है। ऐसे में लाॅकडाउन के बाद तो उनकी स्थिति और भी खराब होने वाली है। शासन प्रशासन को चाहिये कि प्रायवेट कर्मचारी चाहें वह किसी भी संस्था का हो यदि वो लाॅकडाउन में अपने घर पर ही है और काम नहीं कर पा रहा है तो उसको समय पर उसका मानदेय, मजदूरी, तनख्वाह समय पर मिल जाये इस प्रयास के साथ ही हर गरीब परिवार की मदद तो की जाये उनके साथ ही कई मध्यमवर्गीय परिवार जो गरीब से भी बदतर हालातो में है उनको राशन, गैस टंकी के साथ ही अन्य आवश्यक वस्तुएं निःशुल्क मिल जाये इस और उनकी मदद के लिए भी प्रयास होना चाहिये।

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